खबरदार ! अगर यह काम ( पायरेसी ) किया तो हो सकती है आपको 3 साल की जेल और भारी जुर्माना

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खबरदार ! अगर यह काम ( पायरेसी )किया तो हो सकती है आपको 3 साल की जेल और भारी जुर्माना! 

pirated Movies

दोस्तों जरा संभल के अगर आपने भी फिल्म पायरेसी की तो हो सकती है आपको 3 साल की जेल और भरना पड़ सकता है भारी जुर्माना। क्योंकि राज्यसभा में 27 जुलाई 2023 को सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 में संशोधित विधेयक पारित हो चुका है। इस नए कानून के अनुसार अगर आप कोई फिल्म पायरेसी करते पकड़े जाते हैं तो आप पर फिल्म मेकिंग के अंदर लगे रुपयो का 5 परसेंट अमाउंट का जुर्माना और 3 साल तक की जेल हो सकती है।

मान लीजिए अगर किसी फिल्म की मेकिंग में 10 करोड़ रुपए लगे हैं और आप उस फिल्म की पायरेसी करते पकड़े जाते हैं तो आप पर उस फिल्म कि मेकिंग मे लगी लागत का 5 परसेंट यानी 50 लाख का जुर्माना लग सकता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में कहा है कि फिल्म पायरेसी से फिल्म इंडस्ट्री को लगभग 20,000 करोड रुपए का सालाना नुकसान हो रहा है। फिल्म इंडस्ट्री के इस नुकसान को रोकने के लिए है यह बिल पास हुआ है। इस बिल के पास होने से फिल्म इंडस्ट्री को और हमारे देश को बहुत फायदा होगा।

सेंसर सर्टिफिकेट अब नई केटेगरीज़ में फिल्मों को दिया जाएगा
राज्यसभा में पारित इस विधेयक में कुछ नई कैटेगरी जैसे कि UA 7+,UA13+, और UA16+, को भी इस नए कानून में शामिल किया गया है। अब बनने वाली फिल्मों को UA सर्टिफिकेशन के अधीन 7 साल,13 साल,ओर 16साल, वर्ग के दर्शकों के लिए अपनी फिल्मों का अलग-अलग सर्टिफिकेशन लेना होगा। पहले फिल्मे सिर्फ तीन कैटेगरीज़ में बटती थी

इस विधयेक से पहले फिल्में सिर्फ तीन कैटेगरीज़ में बटती थी और उन्हें 3 कैटेगरीज़ में सर्टिफाइड किया जाता था। इसमें पहला होता था U यानी यूनिवर्सल इसका मतलब यह होता था कि अगर किसी फिल्म को U सर्टिफिकेट मिलता है तो उस फिल्म को कोई भी बिना रिस्ट्रिक्शन के देख सकता है चाहे वो किसी भी एज ग्रुप का हो।
फिर इसमें दूसरा होता था UA यानी उंडर एडल्ट इसका मतलब यह होता था कि अगर कोई बच्चा 18 साल से कम उम्र का है तो वे अपने माता-पिता के साथ उनकी देख रेख में UA सर्टिफाइड फिल्मे देख सकता है।
तीसरे नंबर आता था A यानी एडल्ट सर्टिफाइड फिल्मों का इसका मतलब होता था अगर कोई फिल्म A सर्टिफाइड हो तो उन फिल्मों को देखने के लिए आपकी उम्र कम से कम 18 वर्ष से ज़्यादा होनी चाहिए।

ऑनलाइन पायरेसी से बहुत से देशों को नुकसान हुआ है इनमें सबसे ज्यादा नुकसान जिन देशों को हुआ है वो ये देश है
1. इसमें पहले नंबर पर आता है यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका(USA) इस देश को ऑनलाइन पायरेसी कि वजह से पिछले वर्ष 2022 में लगभग 92,000 करोड रुपयो का नुकसान उठाना पड़ा है।
2.इसमें दूसरे नंबर पर आता है चीन(China) इस देश को ऑनलाइन पायरेसी की वजह से पिछले वर्ष 2022 में लगभग 78,000 करोड़ रुपयो का नुकसान उठाना पड़ा है।
3.इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर नाम आता है हमारे देश भारत का हमारे देश भारत में ऑनलाइन पायरेसी की वजह से पिछले वर्ष 2022 में लगभग 24,000 करोड रुपए का नुकसान हुआ है।
4. इस लिस्ट में चौथे नंबर पर नाम आता है ब्राजील (Brazil)इस देश को ऑनलाइन पायरेसी की वजह से पिछले वर्ष 2022 में लगभग 20,000 करोड रुपए का नुकसान हुआ है।
5. इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर नाम आता मेक्सिको (Mexico)इस देश को ऑनलाइन पायरेसी की वजह से पिछले वर्ष 2022 में लगभग 12,000 करोड रुपए का नुकसान हुआ है।
देखा जाए तो लगभग 4.15 लाख करोड़ रुपए यानी 52 बिलियन डॉलर का का नुकसान ग्लोबली ऑनलाइन पायरेसी की वजह से होगा। जो कि बोहत ही बड़ा अमाउंट है।यह इतना बड़ा अमाउंट है कि आप यह समझ सकते हैं कि इस अमाउंट से कम अमाउंट कि कहीं देशों की जीडीपी (GDP )होती है।
अकेले हमारे देश भारत में ही ऑनलाइन पायरेसी से लगभग 24.63 हज़ार करोड़ रुपए का सालाना नुकसान पिछ्ले वर्ष 2022 में हुआ है
रिपोर्ट्स के अनुसार अकेले हमारे देश भारत मे ही ऑनलाइन पायरेसी से पिछले वर्ष 2022 में ओटीटी प्लेटफॉर्म को लगभग 24.63 हज़ार करोड रुपए का नुकसान हुआ है। यह डिजिटल टीवी रिसर्च कि रिपोर्ट है। इन ओटीटी प्लेटफॉर्म को लगभग 6.2 करोड़ यानी 6.2 मिलियन लोग इस्तेमाल करते है। ये लोग पायरेटेड फिल्में देखते हैं उससे सीधे ओरिजिनल फिल्मों को नुकसान होता है।
किसी भी फिल्म या ओटीटी कंटेंट के रिलीज होने के बाद ही कुछ देर के अंदर ही इनके लिंक टेलीग्राम, व्हाट्सएप, और अन्य ऐप्स पर तेजी के साथ शेयर कर दिए जाते हैं जिससे कि इन प्लेटफार्म को इस्तेमाल करने वाले लोग जल्द से जल्द यह फिल्में देख लेते हैं और डाउनलोड कर लेते हैं और जब तक साइबर सेल में पायरेसी कि शिकायत होती है या कोई कार्यवाही की जाती है तब तक करोड़ों लोग फिल्म देख चुके होते हैं। और ओरिजिनल फिल्मों को तब तक बहुत नुकसान हो चुका होता है।

ये वो मोके हैं जब हमारे देश भारत में पायरेसी से हो रहे नुकसान से बचने के लिए पहली बार आवाज उठाई गई थी
1. पहले मोका जब तमिल इंडस्ट्री ने पायरेसी के खिलाफ आवाज उठाते हुए 3 जुलाई 1997 को राज्य के सभी सिनेमाघर बंद करवा दिए थे।
2.दूसरा मोका जब बॉलीवुड प्रोड्यूसर ने पायरेसी के खिलाफ आवाज उठाते हुए फिल्म की मेकिंग, शूटिंग, रिलीज़, प्रमोशन और इससे जुड़ी सभी गतिविधियों पर 11 अगस्त 1997 को रोक लगा दी थी।
हमारे देश भारत में सबसे पहले पायरेसी की शुरुआत सन 1980 में पायरेटेड विसिआर से हुई थी लेकिन आज के टाइम पर टेलीग्राम व्हाट्सएप और केबल टीवी पायरेसी होने के लिए सबसे बड़े ज़िम्मेदार है
पायरेसी के बारे में जनता को अवगत कराने के लिए सोनी लिव एप पर एक वेब सीरीज आई है जिसका नाम तमिल रोकर्स है इस वेब सीरीज में हमारे देश भारत में कई सालों से चलते आ रहा गैर कानूनी पायरेसी का गोरख धंधा केसे चल रहा है इसके बारे में पूरी जानकारी दी गई हैं। आसान भाषा में पायरेसी का मतलब ये होता है कि किसी भी कॉपीराइटेड फिल्म, वेब सीरीज, या कंटेंट, या वीडियो, को गैरकानूनी तरीके से बाज़ार में फैलाना।
वैसे पायरेसी एक ऐसा वर्ड है जो बोलने में और सुनने में तो एक छोटा सा शब्द लगता है और वैसे इसकी प्रोसेस भी बहुत छोटी सी ही होती है। लेकिन इस पायरेसी की वजह से हमारे देश की फिल्म इंडस्ट्री और ओटीटी इंडस्ट्री पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। इससे लगभग 24.63 हज़ार करोड रुपए का सालाना नुकसान पिछले साल वर्ष 2022 में हुआ है। अकेले हमारा देश भारत ही फिल्म पायरेसी की वजह से नुकसान होने वाले देशों यूएसए ओर चीन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर आता है। अगर हमारे देश भारत में पायरेसी ना हो तो इससे हमारे देश की जीडीपी बहुत बढ़ जाएगी जिससे हमारे देश के विकास कार्यों में सहायता होगी और हम एक विकसित देश कहलाएंगे। पायरेसी हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर भी बहुत असर डालती हैं।
तो दोस्तों आप और में हमारे देश और हमारे देश के भविष्य के लिए मिलजुल कर हमारे देश में हो रही पायरेसी को रोक सकते हैं इससे हमारे देश का बहुत फायदा होगा और हमारा देश विकास करेगा


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