आखिर क्यों फैल रही है हिंदुस्तान में धार्मिक नफरत।। जानिए कैसे इस नफरत को किया जा सकता है खत्म!

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आखिर क्यों फैल रही है हिंदुस्तान में धार्मिक नफरत।। जानिए कैसे इस नफरत को किया जा सकता है खत्म!

इस संसार में सभी मनुष्य और जीव-जन्तु को प्रेम चाहिए। कहते है की नफरत से कुछ हासिल नही होता सिवाए पछतावा के। इसलिए हमारे मन में एक दूसरे के प्रति प्रेम भावना होना आवश्यक है। प्रेम से जग जीता जा सकता है। प्रेम का मतलब प्रेमी -प्रेमिका से नही बल्कि समाज में जो नफरत धर्म ,जाति ,अमीर ,गरीब ,एक मुल्क से दूसरे मुल्क और एक इंसान का दूसरे इंसान के प्रति एक ऐसी प्रेम भावना से है जो इस संसार के समस्त लोग , व्यक्ति एक दूसरे से उम्मीद रखता है।
आज हिंदुस्तान अपने इतिहास के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। आज खतरे में सिर्फ हिंदु-मुस्लिम दलित नहीं है बल्कि पूरा हिंदुस्तान है।

हिंदुस्तान
Image Source : Wikimedia Commons

मेरा भारत देश बहुत महान है इसमें कोई शक नहीं है लेकिन इसमें बसने वाले लोगो के दिल में कितनी महानता है? इसके अंदर की तस्वीर क्या है ?आप अब मणिपुर की बात लीजिये जहाँ इंसान दरिंदों की तरह एक दूसरे से मार काट रहे , अभी की बात हरियाणा के नूह की जहाँ धार्मिक जुलूस में हिंसा हो रही है।
अभी कल सुबह की चलती ट्रेन की घटना भी आप सभी ने सुनी होगी जहां एक रक्षा करने वाला सिपाही राक्षस बन गया। आज का युवा किस और जा रहा है। देश में और भी सोचनीय मुद्दे है जैसे महंगाई , बेरोजगारी ,अच्छी शिक्षा ,बेहतर स्वास्थ्य सुविधा। पर आज की युवा पीढ़ी पढ़ क्या रही है ?इतनी नफरत क्यों ? उसकी मानसिक हालत किस तरफ जा रही है।

एक बूढ़ा मुस्लिम आदमी रेल में नमाज अदा करता है और वहीं कुछ युवक तेज़ आवाज़ से जानबूझ कर हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे है। यहाँ मैं किसी मुस्लिम का समर्थन नहीं करता ना हिन्दू के हनुमान चालीसा से आपत्ति जता रहा, यहाँ बात सही और गलत की है एक ऐसी सोच की जो आज की युवा पीढ़ी को इस नफरत की जहरीली मानसिकता ने जकड़ रखा है। ये सामाजिक मुद्दा भी है और एक सामाजिक आईना भी। भारत एक धर्मनिपेक्ष देश है ये उस बगिया की तरह है जिसमें तरह तरह के फूल खिलते है और जितने प्रकार के फूल उतनी उसकी सुंदरता।

हमारा धर्म ये नहीं सिखाता की दूसरे धर्म का अपमान करे। हम मानते है हम दूसरे धर्म को नहीं अपनाते इसका मतलब ये तो नहीं उसका सम्मान भी ना करे।भारत का संविधान, भारत का लोकतंत्र ,भारत का भविष्य। वो संविधान जिसे स्वतंत्रा संग्राम के शूरवीरों ने अपने खून से सींचा था और धर्मनिरपेक्ष लोकत्रांत्रिक गणराज्य की बुनियाद रखी थी। और आज इसी गणराज्य की जड़ों में नफरत का तेजाब डाला जा रहा है।

अभी ताज़ा मामला रचोली का ही देख लीजिए जहां किन्नौर की बेटी के साथ हैवानियत की घटना हुई। बल्कि जिस साहिल सागर नामक आदमी ने किन्नौर की बेटियों की सहायता की उसे भी समाज में नफरत का सामना करना पड़ा। होना तो ये चाहिए था कि उसे सम्मान दिया जाता और कहाँ उसे धमकियों का सामना करना पड़ा। अब यहाँ समाज की मानसिकता भी देखिये किस आधार पर एक समाज के हितेषी को भी हमारा ही समाज अपनी तुच्छ मानसिकता से प्रताड़ित करता है। आज हमारे समाज और राजनीति में जो नफरत की आंधी चल रही है ये कोई नई बात नहीं है। दुनिया के कई देशों में ऐसे दौर आये जब नफरत इंसान के दिल ओ दिमाग में इस कदर हावी हुई की उसने प्रेम मुहब्बत भाईचारे को हमेशा हमेशा के लिये ख़त्म ही कर दिया। ये भी देखने को मिल रहा है की आज भारत की राजनीति में नफरत का बोलबाला है। हर गली ,गाँव ,मोड पर नफरत का राक्षस ऐसे खड़ा है कि मानो कब किसको निगल ले। भाईचारे की राजनीति और संस्कृति अब लाचार नजर आती है। नफरत की राजनीति अपने चरम पर है। मेरा लिखने का उद्धेश्य किसी विशेष राजनीति पार्टी का समर्थन देना या विरोध करना नहीं है जो हालत है उसके आधार पर है।

आज हमारे देश की हालत सचमुच चिंताजनक है और आम जनता परेशान लाचार बेबस हो चुकी है। एक महंगाई , दूसरा बेरोजगारी , और तीसरा भ्रष्टाचार ये तीन दाग़ ऐसे है जिनसे जनता परेशान है और उसमें फिर नफरती लोगों की टोली अपनी रोटी सेंकने आ जाती है।

अपने आने वाली पीढ़ी और अपना भविष्य खतरे में मत डालिये आपके पास और भी कार्य है करने के लिए जैसे कि-

1– एक दूसरे के प्रति प्रेम भावना आदर रखे।

2– अपने आप को इतना मजबूत करे अपने की मस्तिष्क में ऐसी कोई गलत धारणा ही ना आये।

3– भलाई,रहम,दया ,आदर और प्यार से एक दूसरे का और एक दूसरे के धर्म का सम्मान करे। आप इंसान है इंसान बने रहिये अपने अंदर राक्षस एवम् हैवान प्रवृत्ती को हावी ना होने दें।
धन्यवाद।


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