BRICS Summit 2023 : ब्रिक्स सम्मेलन 2023 के लिए दक्षिण अफ्रीका नहीं जाएंगे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी!

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BRICS Summit 2023 : ब्रिक्स सम्मेलन 2023 के लिए दक्षिण अफ्रीका नहीं जाएंगे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी!

जी हां दोस्तों यह खबर बहुत ही बड़ी है BRICS सम्मेलन 2023 के लिए दक्षिण अफ्रीका नहीं जाएंगे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी क्योंकी उनके ब्रिक्स सम्मेलन 2023 में हिस्सा लेने पर अभी तक सस्पेंस कायम है। BRICS सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग सिटी में 22 अगस्त 2023 से 24 अगस्त 2023 तक होने वाला है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने से मना कर चुके हैं।

BRICS Summit 2023
                Image Source : Wikipedia

न्यूज़ एजेंसी ( रॉयटर्स ) के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में वर्चुअली शामिल हो सकते हैं। हमारे देश भारत, के अलावा रूस, चीन, ब्राजील, और दक्षिण अफ्रीका, ब्रिक्स के सदस्य देश हैं। ब्रिक्स (BRICS)शब्द का निर्माण इन सभी सदस्य देशों के नाम के पहले अक्षर को लेकर हुआ है।

भारतीय विदेश मंत्रालय इस मामले है चुप है क्योंकि भारतीय विदेश मंत्रालय से न्यूज़ एजेंसी ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जाने और BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के बारे में सवाल किया तो वहां से किसी भी तरह का कोई जवाब नहीं दिया गया था।रिपोर्ट के अनुसार चीन और रूस BRICS देशों में कुछ और भी देशों को शामिल करवाना चाहते हैं। इसके विपरीत भारत देश की इस मामले में अपनी कुछ अलग शर्ते हैं।

पाकिस्तान देश के साथ-साथ सऊदी अरब ईरान सहित 19 और देशों ने ब्रिक्स के सदस्य देशों में शामिल होने के लिए प्रस्ताव रखा है। ब्रिक्स देशों ने BRICS संगठन को और मजबूत करने के लिए और सदस्य देशों को जोड़ने की बात कही है। हालांकि ब्रिक्स देशो मैं पाकिस्तान देश को जगाह मिलना लगभग मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है।
..इसकी सबसे बड़ी वजह इकॉनोमी है। ब्रिक्स सीधे तौर पर दुनिया का सबसे कंप्लीट माने जाने वाले वित्तई संगठन G7 का तगड़ा कॉम्पिटीटर है। जीडीपी पर क्रय की शक्ति के मामले में चीन देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसमें भारत तीसरी, इसमें रूस छठी, और ब्राजील आठवीं अर्थव्यवस्था है। इन सभी ब्रिक्स देशों की दुनिया की जी डी पी मे 31.5% हिस्सेदारी होती है। ऐसे में पाकिस्तान देश को ब्रिक्स देशों में शामिल करने से यह संगठन आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा इसलिए पाकिस्तान को BRICS देशों में जंगाह मिलना लगभग नामुमकिन ही है।

पिछले महीने शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) कि मीटिंग को भारत देश ने होस्ट किया था। बिल्कुल एन मोमेंट पर इसे वर्चुअली ऑर्गेनाइज किया गया था। ऐसा होने की वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कोई भी बयान नहीं जारी किया गया था।

भारत देश धीरे-धीरे ब्रिक्स से दूरी बना रहा है रिपोर्ट में भारत देश के एक बड़े अफसर के हवाले से कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ब्रिक्स और (SCO) को लेकर अब बहुत ज्यादा एक्टिव नहीं रहना चाहती है। इसकी मुख्य वजह यह भी है कि इन दोनों ही प्लेटफार्मस पर चीन देश का दबदबा भारत देश से ज्यादा है। और भारत देश के रिश्ते चीन देश से पिछले 3 वर्षों से कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। सन 2020 में लद्दाख में चीन देश और भारत देश के सैनिकों के बीच में जो लड़ाई हुई थी उसके बाद जो हालात बने थे उन हालातों को अब तक पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सका है।
एक मुख्य वजह यह भी बताई जा रही है कि ताजा समय में भारत देश और अमेरिका एक दूसरे के काफी करीब हो चुके है।और वेस्टर्न पॉवर के लिए चीन देश की नापसंदी किसी से भी नहीं छुपी हुई है। पिछले महीने (SCO) सम्मेलन से ठीक पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे से लौटे थे। वहां बायडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने उन्हें वहा पर रेड कारपेट वेलकम दिया था। हालांकि रूस देश ने इस चीज़ पर बहुत ही बैलेंस वाला रिएक्शन दिया था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि भारत देश और अमेरिका के रिश्ते अपनी जगह है। उससे रूस देश को कोई प्रॉब्लम नहीं है।
अगले महीने भारत देश में G20 सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस G20 सम्मेलन में सभी देशों के हेड्स ऑफ स्टेट भागीदारी लेंगे।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नहीं होने की मुख्य वजह यह है
ब्रिक्स सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने को लेकर ब्रिक्स का होस्ट देश दक्षिण अफ्रीका सोच विचार में था। इसकी मुख्य वजह यह भी है कि यूक्रेन देश पर हमले और वोर क्राइम्स को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी)ने वारंट जारी कर रखा है। और अगर वह दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में आते हैं तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गिरफ्तारी का खतरा बना रहता है। लिहाजा इसके मद्देनजर दक्षिण अफ्रीकी और रूसी सरकार के बीच समझौता हुआ। और इसके बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की गैर उपस्थिति के बारे में जानकारी सभी को दी गई।
..रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नहीं होने पर होस्ट देश दक्षिण अफ्रीका ने कहा है कि हमने रूसी सरकार से इस बारे में बातचीत की थी। और दोनों देशों ने इस बात पर सहमति बना ली है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे।न्यूज़ एजेंसी ( रॉयटर्स )के रिपोर्ट के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट (ICC ) में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ वॉर क्राइम्स को लेकर केस दर्ज हुए हुआ है।और अगर वो होस्ट देश दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में आते हैं तो मेंबर देश होने के नाते दक्षिण अफ्रीकी सरकार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गिरफ्तार कराना पड़ता। लिहाजा इसके मद्देनजर दोनों देशों की सरकार में यह तय किया गया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) ने इसी साल मार्च 2023 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर यह आरोप है कि उन्होंने यूक्रेन देश पर हमले के दौरान गैर कानूनी तरीके से यूक्रेनी बच्चों को रूस देश डिपोर्ट किया है। इसके दूसरी और रूस देश का दावा ये है कि रूस देश अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी ) का मेंबर ही नहीं है तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ निकाला गया वारंट भी गैरकानूनी ओर अवैध माना जाएगा।

ब्रिक्स सम्मेलन क्या है
ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन का मतलब (ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका,) इन सभी देशों के एक ग्रुप को ब्रिक्स कहते हैं। इसकी स्थापना सन 2009 में हुई थी।
ब्रिक्स ग्रुप को बनाने का मुख्य मकसद वेस्टर्न कंट्रीज़ के प्रभाव को अपने इकोनॉमी और पॉलिटिकल दबदबे से चैलेंज करना है।
ब्रिक्स ग्रुप ने वॉशिंगटन में मौजूद अंतर्राष्ट्रीय मॉनेटरी फंड और वर्ल्ड बैंक के मुकाबले में अपना खुद का एक बैंक तैयार कर लिया है।
ब्रिक्स ग्रुप को बनाने का आइडिया सबसे पहले इनवेस्ट बैंक गोल्डमेन सेक्स के संस्थापक जिम ओ निल ने सन 2001 में दिया था।
ब्रिक्स ग्रुप के समूह में दक्षिण अफ्रीका देश पहले शामिल नहीं हुआ था। तब तक इस ग्रुप को ब्रिक ग्रुप कहा जाता था। बाद में जब दक्षिण अफ्रीका यानी साउथ अफ्रीका जुड़ा तो यह ब्रिक (एस) जुड़ने से ब्रिक्स हो गया।
पूरी दुनिया की जीडीपी में इन ब्रिक्स ग्रुप के देशों का हिस्सा 31.5% है।


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