Eye Flu : इन बातों का ध्यान रखें वरना होगा बड़ा पछतावा

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Eye Flu : इन बातों का ध्यान रखें वरना होगा बड़ा पछतावा:

स्वाइन फ्लू और कोरोना के बाद एक और बीमारी देशवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है जी हां हम बात कर रहे हैं आई फ्लू यानी कंजेक्टिवाइटिस की।

Eye Flu

आंखों की पुतली की बाहरी झिल्ली और भीतरी पलक की सूजन या संक्रमण कंजेक्टिवाइटिस ( Eye Flu ) कहलाता है। इसे गुलाबी आंख भी कहा जाता है अर्थात आंखों की पुतली की बाहरी झिल्ली जिसे कंजेक्टिवा कहते हैं इस कंजेक्टिवा में जलन और सूजन को कंजेक्टिवाइटिस कहा जाता है यह एलर्जी,बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण की वजह से होता है कंजेक्टिवाइटिस ( Eye Flu ) एक बेहद संक्रामक बीमारी है और यह संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले स्त्राव के संपर्क में आने से फैलता है

कंजेक्टिवाइटिस के प्रतिवर्ष 10 मिलियन मामले भारत में आमतौर पर होते हैं और एक चिकित्सा पेशेवर द्वारा इस संक्रमण का उपचार किया जा सकता है आमतौर पर यह संक्रमण 7 से 10 दिनों के भीतर स्वत: ही ठीक हो जाता है लेकिन अगर इसका सही तरह से उपचार किया जाए तो ये 1 से 2 दिन में भी ठीक हो सकता है भारत में अभी आई फ्लू से संक्रमण की गति बहुत तेजी से बढ़ रही है हॉस्पिटल में कंजेक्टिवाइटिस के मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई है ऑफिस,कंपनी,व्यापारी,दुकानदार सभी तरह के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं इसके बढ़ते हुए संक्रमण की वजह से लोगों में इसका भय बढ़ता जा रहा है बड़े-बूढ़े और बच्चे सभी संक्रमण का शिकार हो रहे हैं बढ़ते हुए फ्लू ने प्रशासन को भी सकते में डाल दिया है आमजन के साथ-साथ राज्य सरकार और केंद्र सरकार भी Eye Flu (कंजेक्टिवाइटिस) के बढ़ते संक्रमण को लेकर चिंतित हैं

हॉस्पिटल और बाजारों से होता हुआ यह संक्रमण स्कूली बच्चों तक पहुंचने लगा, शहरों में Eye Flu से संक्रमित बच्चों की संख्या बढ़ रही है और इसका असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा है अधिकांश स्कूलों में रोज 15 से 20 बच्चे Eye Flu से संक्रमित हो रहे हैं स्कूल प्रशासन को ऐसे बच्चों की छुट्टी करनी पड़ रही है बहुत से स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं लेकिन बच्चों के संक्रमित होने की वजह से उन स्कूलों ने परीक्षाएं स्थगित कर दी है लगातार संक्रमण बढ़ने की वजह से संक्रमित बच्चों को छुट्टी देकर के उन्हें ऑनलाइन पढ़ने के लिए कहा जा रहा है स्कूल प्रशासन की ओर से बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के संक्रमण ठीक नहीं होने तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजने की सलाह भी दी जा रही है सीएमएचओ-पीएमओ की ओर से संक्रमण संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह के निर्देश पर कंजेक्टिवाइटिस ( Eye Flu )संक्रमण से बचाव और रोकथाम के लिए सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

कंजेक्टिवाइटिस Eye Flu से संबंधित कुछ जरूरी बातें:-

1-आई फ्लू आसानी से फैलता है:- ये संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से,उस से हाथ मिलाने से,उससे गले मिलने से और उसके आंखों में से बहने वाले स्त्राव के संपर्क में आने से फैलता है इसका संक्रमण तेजी से और बहुत आसानी से फैलता है।

2-एक चिकित्सा पेशेवर द्वारा उपचार योग्य:- आई फ्लू को चिकित्सा पेशेवर द्वारा ठीक किया जा सकता है चिकित्सा पेशेवर की देखरेख में सही उपचार लेकर संक्रमण को और अधिक फैलने से रोका जा सकता है।

3-लैब टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती:- आई फ्लू के संक्रमण की पुष्टि के लिए किसी लैब टेस्ट की आमतौर पर कोई जरूरत नहीं होती क्योंकि इसके लक्षण आमतौर पर साफ दिखाई दे जाते हैं और संक्रमण का पता चल जाता है अर्थात कंजेक्टिवाइटिस (आई फ्लू) के डायग्नोज के लिए किसी लैब टेस्ट की जरूरत नहीं होती।

4-लक्षण:- आई फ्लू के लक्षणों में सामान्यता आंखों का लाल होना,आंखों में तेज दर्द होना,आंखों से पानी आना,आंखों में जलन और खुजली होना और आंखों की पुतली के चारों तरफ लाल या पीली पपड़ी आना सूजन आना आदि शामिल है।

5-बचाव:- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में ना आएं ,भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें,आंखों पर चश्मा लगा कर रखें,प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचें,आंखों को बार-बार हाथ से ना छुएं संक्रमित व्यक्ति की आंखों में ना देखें,संक्रमित व्यक्ति से हाथ ना मिलाएं।

6-उपचार/इलाज:- आई फ्लू से संक्रमित होने के बाद कांटेक्ट लैंस ना पहनें, आई फ्लू के इलाज के लिए एंटीहिस्टामाइन जैसे कि सेट्रिजीन,हाइड्रोक्सीजीन टेबलेट ले सकते हैं और इसके साथ एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स जैसे कि सिप्रोफ्लोक्सासिन आई ड्रॉप्स,ओफ़्लॉक्सासिन आई ड्रॉप्स या टोब्रामाइसिन आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं


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