Saudi Arabia की यह खबर ज़रूर पड़िए जो आपके जीवन को जोश से भर देगी।

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Saudi Arabia की यह खबर ज़रूर पड़िए जो आपके जीवन को जोश से भर देगी –

जी हां दोस्तों Saudi Arabia देश की यह खबर ज़रूर पड़िए जो आपके जीवन को जोश से भर देगी। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम हमेशा परेशान,हैरान, डिमोटिवेट, और जीवन से हारे हुए से रहते हैं। वही आज के इस दौर में Saudi Arabia में इन दिनों 110 साल की उम्र वाली स्टूडेंट की चर्चा चारों तरफ हो रही है। Saudi Arabia की इस 110 साल की उम्र की महिला का नाम नवाद अल कहतनी बताया जा रहा है। नवाद अल कहतनी Saudi Arabia सरकार के स्पेशल एजुकेशन प्रोग्राम का हिस्सा बनी हुई है। Saudi Arabia सरकार के इस स्पेशल एजुकेशन प्रोग्राम के तहत किसी भी उम्र के लोग सरकारी स्कूल में जाकर बेसिक एजुकेशन ले सकते है।

Saudi Arabia
Image Source: Freerange Stock

 

नवाद अल कहतनी चार बेटो की मां है उनके सबसे बड़े बेटे की उम्र करीब 80 साल है और सबसे छोटे बेटे की उम्र करीब 50 साल है। सभी बच्चे अपनी मां को इस उम्र में भी तालीम हासिल करते हुए देख रहे हैं। और वह अपनी मां के इस काम से बहुत खुश हैं। नवाद का तीसरे नंबर का बेटा उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए जाता है, और नवाज के स्कूल की छुट्टी होने तक उनका बेटा स्कूल के बाहर ही अपनी मां के इंतजार में बैठा रहता है। ताकि वह अपनी मां को बिना किसी दिक्कत परेशानी के घर तक सही सलामत ले जा सके।

देर आए दुरुस्त आए :

Saudi Arabia सरकार ने अपने देश में अल रहवा सेंटर को खोला है। दरअसल यह एक बेसिक शिक्षा की एक चेन है। जिसको खास तौर पर Saudi Arabia देश के पिछड़े हुए हिस्से दक्षिण पश्चिम के लिए डिजाइन कराया गया है। हालंकी Saudi Arabia देश के कुछ और हिस्सों में भी यह प्रोग्राम चलाया जाता है।
नवाद अल कहतनी की बात की जाए तो वो Saudi Arabia देश के उमवाह इलाके की है। नवाद अल कहतनी का मानना है कि कुछ भी सीखने के लिए कोई उम्र नहीं होती है। इंसान किसी भी उम्र में कुछ भी सीख सकता है। नवाद अल कहतनी कहती है कि जहां तक मेरे इल्म हासिल करने का सवाल है। तो मैं बस यह कहना चाहूंगी कि देर आए दुरुस्त आए।
Saudi Arabia सरकार अपने देश में इलिटरेसी यानी जहालत को पूरी तरह खत्म कर देना चाहती है।नवाद अल कहतनी इल्म हासिल करने के लिए कितनी बेताब है, इस बात का अंदाजा सिर्फ एक इस बात से लगाया जा सकता है, कि जिस दिन से उन्होंने स्कूल में दाखिला लिया है, उसे दिन से अभी तक एक दिन भी उन्होंने स्कूल की छुट्टी नहीं की है।वह रोज इल्म हासिल करने के लिए स्कूल जाती है।

नवाद अल कहतनी 110साल की उम्र में क्या सीख रही है:

(अरब वर्ल्ड) वेबसाइट के अनुसार नवाद अल कहतनी और उनके जैसी कई और महिलाएं और पुरुष Saudi Arabia देश के स्कूलों में अक्षरों को पहचानना और पढ़ना और लिखना सीख रहे हैं। इसके साथ-साथ उन सभी को पाक किताब कुरान शरीफ के बारे में भी सिखाया पढ़ाया जा रहा है।
नवाद अल कहतनी कहती है कि वो अपने सबक को बड़े ध्यान और सब्र के साथ पढ़ती है। उन्हें पढ़ने में बहुत मजा आ रहा है। स्कूल में उन्हें होमवर्क करने के लिए भी मिलता है। अगले दिन वह घर से इसे पूरा करके लाती हैं। उनके टीचर इसे चेक भी करते हैं। Saudi Arabia देश के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान(एमबीएस)2030 अपने देश को डेवलप्ड कंट्री बनाने के लिए उनके द्वारा कही सेक्टर्स में कई तरह के प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। शिक्षा को भी इस प्रोग्राम मे सम्मिलित किया गया है।नवाद अल कहतनी इस चीज के लिए क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की तहे दिल से शुक्रगुजार है।

नवाद अल कहतनी के लिए स्कूल लौटना इतना आसान भी नहीं था :

नवाद अल कहतनी करीब 100 साल के बहुत ही लंबे अरसे को गुज़र जाने के बाद स्कूल लौटने बाद कहती है कि उम्र के इस मुकाम में जाकर स्कूल दोबारा वापस लौटना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम है। उन्होंने पहली बार जब इस एजुकेशन प्रोग्राम के बारे में सुना तो उन्हें बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा था। उन्हें लगता है कि उन्हें अपनी तालीम कई सालों पहले ही दोबारा वापस शुरू कर देनी चाहिए थी। आज इस बात का उन्हें बहुत अफसोस होता है कि पूरी जिंदगी उन्होंने बिना इल्म के जहालत में गुजार दिए। अब न सिर्फ उनकी जिंदगी बदलेगी, बल्कि वह दूसरों की जिंदगी भी सवार सकती है और उन्हें मोटिवेट कर सकती हैं और लोग उनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं।

नवाद अल कहतनी के बच्चे अपनी मां के दोबारा फिर से स्कूल जाने को लेकर बहुत ही ज्यादा खुश है। और वह इस चीज का सात भी दे रहे हैं। उनका एक बेटा कहता है कि यह सब जो भी हो रहा है अल्लाह ताला की मर्जी से हो रहा है। वे रोज उनकी मां को स्कूल लेकर जाते हैं ओर जब तक स्कूल की छुट्टी नहीं हो जाती तब तक वो उनके इंतजार में स्कूल के बाहर बैठे रहते है। और अपनी मां के बाहर आने का इंतजार करते रहते है। उनकी मां के स्कूल में को एजुकेशन के इंतेजामात नहीं है। और महिलाओं और लड़कियों के लिए इस इलाके में सिर्फ एक ही स्कूल है जिसकी वजह से यहां के टीचर्स पर ज्यादा स्टूडेंट होने के कारण ज्यादा लोड रहता है।

नवाद अल कहतनी की 110 साल उम्र हो जाने के बाद भी उनके जज्बे उनके जोश और उनकी मेहनत को देखते हुए हम सबको यह सीख मिलती है कि जिंदगी में कभी भी हार नहीं मानना चाहिए और जिंदगी में कुछ भी चीज शुरू करने के लिए कोई सही वक्त या कोई सही दिन नहीं होता, आप जब चाहे जहां से चाहे कुछ भी और किसी भी चीज की शुरुआत कर सकते हैं और अपने जिंदगी को एक बेहतर जिंदगी बना सकते हैं।

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