UCC के बारे मैं वो सबकुछ जो आपको पता होना चाहिए!

Spread the love

UCC : समान नागरिक संहिता के बारे मैं वो सबकुछ जो आपको पता होना चाहिए!

UCC की स्पष्ट तस्वीर अभी एक गुप्त मोड पर है यह कैसा कानून होगा और इसके क्या प्रावधान रहेंगे यह अभी कहना उचित नहीं है लेकिन जैसा कि सूत्रों के हवाले से और तथ्यों के स्पष्टीकरण से मालूम होता है।

UCC
Image Source : PTI

केंद्र सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 3 वादों को पूरा करने की घोषणा की थी जिसमें :-

  • एक था राम मंदिर का निर्माण
  • एक था कश्मीर से धारा 370 हटाना
  • और एक संपूर्ण देश में यूसीसी लागू करना

राम मंदिर का निर्माण कार्य अभी जारी है कश्मीर से धारा 370 को खत्म किया जा चुका है और अब बात केंद्र सरकार के तीसरे और आखिरी चुनावी वादे को पूरा करने की है लेकिन UCC का जिक्र छिड़ते ही राजनीतिक पार्टियों और समस्त देशवासियों की सोच अलग अलग दिख रही है कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं तो कुछ लोग इसके समर्थन में है दरअसल UCC कानूनों का एक ऐसा समूह है जो सभी नागरिकों के लिए उनके धर्म की परवाह किए बिना शादी,तलाक,गोद लेने,विरासत और उत्तराधिकार आदि व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करता है UCC का उद्देश्य विभिन्न समुदायों पर लागू विभिन्न कानूनों को प्रतिस्थापित करके सभी के लिए समान कानून लागू करना है इन कानूनों में हिंदू विवाह अधिनियम,हिंदू तलाक अधिनियम,भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम,भारतीय ईसाई तलाक अधिनियम,भारतीय मुस्लिम विवाह अधिनियम,भारतीय मुस्लिम तलाक अधिनियम,हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम,मुस्लिम उत्तराधिकार अधिनियम, पारसी विवाह और तलाक अधिनियम आदि शामिल हैं केंद्र सरकार के अनुसार UCC सभी नागरिकों के बीच एक-समान पहचान और अपनेपन की भावना पैदा करके राष्ट्रीय एकता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देगा इससे विभिन्न समुदायों के विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाले सांप्रदायिक विवादों में भी कमी आएगी और यह सभी के लिए समानता,भाईचारे और सम्मान के संवैधानिक मूल्यों को कायम करेगा भारत में अभी गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां UCC लागू है यानी कि वहां धर्म,लिंग और जाति कुछ भी हो सभी के लिए एक समान पारिवारिक कानून है चाहे हिंदू-मुस्लिम हो या सिख-ईसाई सभी धर्म के लोग विवाह,तलाक और उत्तराधिकार संबंधित एक ही कानून से बंधे हैं।

भले ही भारत का विभाजन 1947 में हुआ था और उस समय बहुत से मुस्लिम सीमा के उस पार चले गए थे और जो लोग यहां यानी भारत में रुके उनको अपना धर्म,अपने मजहब का पालन करने की आजादी संविधान द्वारा दी गई अब कई मुसलमानों को यह डर है कि UCC लागू होने के बाद शरिया में निहित उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक कानून खत्म हो जाएंगे लेकिन संविधान ने यह स्पष्ट किया कि UCC अदालतों के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता इसको लागू करने के लिए समस्त नागरिकों का विचार-विमर्श मत एवं समर्थन जरूरी है बात सिर्फ मुस्लिमों की ही नहीं हिंदुओं,सिख और ईसाईयों की भी है अगर यूसीसी को लागू किया जाता है तो सर्वप्रथम हिंदू विवाह अधिनियम (1955) और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (1956) में संशोधन करना होगा उदाहरण के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2(2) कहती है कि इसके प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे

अर्थात सभी धर्मों में विवाह के,तलाक के,उत्तराधिकार के और विरासत के अपने-अपने नियम कानून हैं और लोग सदियों से उनका पालन कर रहे हैं ऐसे में यदि अब UCC लागू किया जाता है तो उन सभी धर्मों के लोगों को अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों को छोड़कर UCC के अंतर्गत संबंधित कानूनों का पालन करना होगा जोकि बिल्कुल भी संभव और आसान नहीं है यूसीसी का असर किसी एक समुदाय विशेष पर ना होकर सभी समुदायों पर सभी समाज और सभी धर्मों के लोगों पर बराबर होगा हालांकि भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के कारण यूसीसी लागू करने का फैसला चुनौतियों भरा होगा पर केंद्र सरकार यूसीसी लागू करने का मन बना चुकी है जबकि विपक्षी पार्टियां और अन्य राजनीतिक दल इसके विरोध में है भारतीय विधि आयोग (2018) के अनुसार यूसीसी इस स्तर पर ना तो आवश्यक है और ना ही वांछनीय है, क्योंकि यह राष्ट्र की सद्भावना के लिए अनुत्पादक होगा भारतीय विधि आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि व्यक्तिगत कानूनों में सुधार संशोधन द्वारा किया जाना चाहिए ना कि प्रतिस्थापन द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 मौलिक अधिकारो के रूप में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के संचालन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं केंद्र सरकार के अनुसार यूसीसी विभिन्न कानूनों को एक ही कोड में मिलाकर और सुसंगत बनाकर कानूनी ढांचे को सरल बनाएगा इससे कार्यान्वयन में आसानी होगी स्पष्टता बढ़ेगी और न्यायपालिका पर पड़ने वाला बोझ कम होगा जिससे और अधिक कुशल कानूनी कार्यप्रणाली सुनिश्चित होगी

भारत में बसने वाले लोगों के धर्मों के अलग अलग पर्सनल लॉ:

  • भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम 1872
  • क़ाज़ी अधिनियम 1880
  • पारसी विवाह और तलाक अधिनियम 1936
  • शरीयत अधिनियम 1937
  • मुस्लिम विवाह अधिनियम 1939
  • हिंदू विवाह अधिनियम 1955
  • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956
  • हिंदू अप्राप्तव्यता और संरक्षता अधिनियम 1956
  • हिंदू दत्तक तथा भरण पोषण अधिनियम 1956
  • मुस्लिम महिला अधिनियम 1986

क्या UCC से हिंदू प्रभावित होंगे?
जी हां अगर यूसीसी लागू किया जाता है तो करोड़ों हिंदू परिवार इससे प्रभावित होंगे यूसीसी लागू होने के बाद पैदा होने वाले व्यक्तियों के अधिकारों के बारे में प्रावधान करने के साथ-साथ मौजूदा संयुक्त परिवारों के बारे में भी प्रावधान यूसीसी कानूनों के तहत करना होगा।

अगर बात की जाए यूसीसी के नकारात्मक पहलू की तो इसका सबसे बड़ा तर्क यह है कि UCC पसंद के धर्म को मानने की संवैधानिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है क्योंकि संविधान के अनुसार सभी मजहब के लोगों को अपने मजहब का पालन अपने हिसाब से करने की पूरी छूट है
अत: यह कहना गलत नहीं होगा कि यूसीसी के कुछ फायदे तो कुछ नुकसान भी हैं जिस तरह से हर सिक्के के दो पहलू होते हैं एक सकारात्मक और एक नकारात्मक ठीक उसी तरह यूसीसी भी किसी किसी मामलों में सकारात्मक लगता हुआ नजर आ रहा है और किसी मामलों में उसकी नकारात्मकता दिख रही है केंद्र सरकार के लिए इसे लागू करना और इसके प्रावधान को धरातल पर लाना आसान काम नहीं है यह दिखने में जितना आसान है लागू होने में उतना ही पेचीदा दिखाई दे रहा है अब यह देखने वाली बात है कि सरकार UCC (समान नागरिक संहिता) को लागू करती है या नहीं।


Spread the love

Leave a comment